-शेख रईस अहमद-
जब भी मैं इस बात पर सोचता हूं तो मेरा मस्तिष्क मंडल कुछ और ही सोचने लग जाता है। हमारे देश में कुख्यात अपराधियों या यूं कहे पहुंच वाले लोगों के लिए आज भी प्रशासन उसी तरह गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है जैसा स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले हर हिंदुस्तानी था। सांई भक्ति की आड़ में सैक्स रेकेट चलाने वाले इच्छाधारी बाबा उर्फ शिवमूर्त द्विवेद्वी को दिल्ली पुलिस एक बार फिर से चित्रकूट तो ले गई लेकिन यहां पर कुछ ऐसा हुआ जिससे पुलिस प्रशासन की जांच संदेह के घेरे में आई गई। इच्छाधारी बाबा यूपी के चित्रकूट में जब पुलिस के साथ पहुंचा तो यहां पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। यह हुजूम किसी अपराधी को देखने के लिए नहीं बल्कि अपने गुरू के दर्शन के लिए एकत्रित हुई थी। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर बाबा ने पुलिस के साथ लोगों का मजमा जमाया। पुलिस की मौजूदगी में बड़ी संख्या में लोग आकर बाबा के पैर छूकर आर्शीवाद ले रहे थे। यह सिलसिला यहां ही नहीं रूका, लोगों से मिलने के बाद बबा को पुलिसवालों ने बाहर से चाय मंगाकर पिलाई और खुद पिया। चाय पीते समय बाबा इस तरह से चर्चा में मशगूल थे कि लग ही नहीं रहा था कि पुलिसवालों के साथ कोई अपराधी बैठा है। विडम्बना की बात है कि हमारी पुलिस बस ऐसी महत्वपूर्ण जगहों पर ही चूक क्यों करती हैं। अपराधी चाहे कोई हो उसका न कोई धर्म होता है और न ही कोई ईमान। उसका तो सिर्फ एक ही मकसद होता है जैसे तैसे अपने द्वारा किसी अपराध को अंजाम देना। अब सिक्के के दूसरे पहलू पर भी जरा गौर फरमाए। तथाकथित संतों की बदनामी को देखते हुए अयोध्या के संत महंत मठ मंदिरों में अकेली महिलाओं को न आने की सलाह दे रहे हैं। रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास का मानना है कि महिलाओं को मंदिरों और मठों में भी अकेले जाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। महंत की सलाह है कि महिलाएं जब भी मंदिरों या मठों में जाए अपने परिवार वालों को साथ लेकर जाए। मेरा कहने का मतलब है कि हम एक तरफ तो अपराधी को वीआईपी ट्रीटमेंट दे रहे हैं और दूसरी तरफ श्रद्धालु महिलाओं पर इस तरह की पाबंदी की बात कह रहे हैं। मंदिर हो मस्जिद या फिर गुरूद्वारा-चर्च। ये सभी ऐसे स्थान है जहां विभिन्न धर्मो के मानने वाले पूजा, इबादत, प्रे या अरदास करते हैं अपने प्रभू से। ऐसे में हमने जरूर वैज्ञानिक तरक्की तो कर ली लेकिन सोच को विकसित नहीं कर पाए। वरना ये होता कि मंदिरों में महिलाओं को अकेली आने जाने की सलाह की बजाए उन पाखंडी ढोंगी साधु महात्माओं को सबक सीखाने की बात कही जाती। इन तथाकथित साधु महात्माओं के लिए भी और कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
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